
अब रेल की पटरियों पर भी चलेंगे सामान से लदे ट्रक। इसमें ये ट्रक ना तो जलाएंगे डीजल, ना देंगे टोलटैक्स, और ना करेंगे प्रदूषण, ट्रक के टायर भी नहीं घिसेंगे, एक्सीडेंट भी होगा और ड्राइवर आराम से सोएगा, फिर भी सामान समय पर पहुंचेगा।
ये सभी सुनते हुए किसी जादू या किसी फिक्शन मूवी का ख्याल मन में आता है। लेकिन यह कोई जादू या किसी फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है बल्कि भारतीय रेल की हकीकत है।
जम्मू रेल मंडल ने जम्मू से रोल-आन/रोल-आफ (आरओ-आरओ) यानी ट्रक-आन-ट्रेन सेवा शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सोमवार को हितधारकों की एक बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक, जम्मू विवेक कुमार ने की, जिसमें वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल और वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक सहित रेलवे के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रस्तावित आरओ-आरओ सेवा के तहत लदे हुए ट्रकों को विशेष रूप से तैयार रेलवे वैगनों पर चढ़ाकर लंबी दूरी तक रेल मार्ग से पहुंचाया जाएगा। रेलवे का मानना है कि इससे सड़क और रेल नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा तथा मल्टीमाडल परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस सेवा से ट्रक आपरेटरों को ईंधन खर्च, टोल टैक्स और वाहनों के रखरखाव में राहत मिलेगी। साथ ही राजमार्गों पर भारी वाहनों की संख्या कम होने से यातायात दबाव घटेगा और सड़क सुरक्षा में भी सुधार आएगा। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्र में यह सेवा काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जहां खराब मौसम और भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क अक्सर प्रभावित होता है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने बताया कि प्रस्तावित माडल के तहत ट्रक निर्धारित रेलवे टर्मिनलों पर पहुंचेंगे और विशेष रैंप के जरिए वैगनों पर चढ़ाए जाएंगे। इसके बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से बांधकर ट्रेन के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा, जहां ट्रकों को उतारा जाएगा।









