
नई दिल्ली।
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के महत्व पर बल देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस), के अनुरूप समुद्री गतिविधियों और निर्बाध व्यापार का समर्थन किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की दूसरी संवाद बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रौद्योगिकी अनुसंधान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
बैठक में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के प्रयासों पर चर्चा की और समुद्री गश्ती विमानों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही पनडुब्बी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने और भारतीय तटरक्षक बल तथा ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सीमा कमान के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मंत्रियों ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की। उन्होंने 2027 में होने वाले एक्सरसाइज टैलिस्मान सेबर में भारत की भागीदारी की उम्मीद जताई। साथ ही भारत के एक्सरसाइज मिलान 2026 और ऑस्ट्रेलिया के एक्सरसाइज काकाडू 2026 में दोनों देशों की भागीदारी का स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने सेना अभ्यास ऑस्ट्राहिंद के दायरे के विस्तार, ऑपरेशन रेंडर सेफ 2026 में भारत की पहली भागीदारी तथा पनडुब्बी बचाव अभ्यास ब्लैक कैरिलॉन में सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में परिचालन मुख्यालयों के बीच सूचना साझाकरण को बढ़ावा देने और इस वर्ष के अंत में पहली संयुक्त स्टाफ वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तर पर सुरक्षित द्विपक्षीय संचार के महत्व को भी रेखांकित किया। प्रशिक्षण सहयोग के तहत वर्ष 2028-29 में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा महाविद्यालय में एक भारतीय अतिथि प्रशिक्षक की तैनाती की व्यवस्था को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने पर भी सहमति बनी।









