
नई दिल्ली।
नशा मुक्त भारत के अभियान के तहत रोकथाम, जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण पर आधारित व्यापक रणनीति के माध्यम से नशे के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान को मजबूत कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य मादक द्रव्यों के उपयोग विकार से प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें सामान्य जीवन की मुख्यधारा में वापस लाना है।
वर्ष 2019 में जारी पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सामने आया था कि देश में 7 करोड़ से अधिक लोग मादक पदार्थों के उपयोग विकार से प्रभावित हैं। इनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं शामिल थीं। इसके बाद मंत्रालय ने NAPDDR के तहत रोकथाम, जागरूकता, क्षमता निर्माण, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को शामिल करते हुए व्यापक कार्ययोजना लागू की।
वर्ष 2020 में शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) ने जागरूकता गतिविधियों को व्यापक स्तर पर पहुंचाया है। अभियान के माध्यम से समुदायों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को नशे के खिलाफ एकजुट किया जा रहा है। मंत्रालय का मानना है कि केवल कानून प्रवर्तन पर्याप्त नहीं है, बल्कि मांग में कमी लाने के लिए जागरूकता और पुनर्वास भी उतने ही आवश्यक हैं।
टोल-फ्री नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 सहायता चाहने वाले व्यक्तियों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। इस हेल्पलाइन पर अब तक 4.69 लाख कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं, NMBA ऐप 2.0 के माध्यम से राज्यों, जिलों और विभिन्न संगठनों को अभियान से जुड़ी गतिविधियों का डेटा अपलोड करने की सुविधा दी गई है, जिससे कार्यक्रमों की वास्तविक समय में निगरानी संभव हो रही है।










