
गुरुग्राम।
गुरुग्राम के रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू हो गई है। रहेजा डेवलपर्स के मालिक नवीन रहेजा ने ग्राहकों से 95% तक पैसा लेकर भी उन्हें फ्लैट नहीं दिए। रेवांता प्रोजेक्ट के 176 ग्राहकों ने संयुक्त रूप से रहेजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें कोर्ट से गुजारिश की गई थी कि सरकार एनसीएलटी द्वारा रहेजा डेवलपर्स को दिवालिया घोषित करे और सरकार द्वारा काम पूरा करके उन्हें फ्लैट्स दिये जाएं।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) नई दिल्ली की प्रधान पीठ ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के विरुद्ध दिवाला कार्रवाई शुरू करने की याचिका स्वीकार कर ली है। न्यायाधिकरण ने माना कि कंपनी द्वारा खरीदारों को तय समय पर फ्लैटों का कब्जा नहीं देने का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने फ्लैटों की कीमत का 90 से 95 प्रतिशत तक भुगतान कर दिया है। न्यायाधिकरण को बताया गया कि कंपनी ने वर्ष 2011 में रेवांता परियोजना की शुरुआत की थी। स्वतंत्र फ्लोर का कब्जा 36 माह और ऊंची इमारतों में बने फ्लैटों का कब्जा 48 माह के भीतर देने का वादा किया गया था।

रहेजा डेवलपर्स ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी के समक्ष भी समय सीमा बढ़वाकर प्रोजेक्ट को 31 जुलाई 2022 तक पूरा करने की समय-सीमा घोषित की गई थी। इसके बावजूद खरीदारों को न तो कब्जा मिला और न ही देरी के लिए वादा किया गया मुआवजा। यह भी आरोप है कि कंपनी ने कई बार देरी स्वीकार करते हुए कब्जा और मुआवजा देने का आश्वासन दिया, लेकिन उन वादों को पूरा नहीं किया गया।
रहेजा डेवलपर्स ने अपने बचाव में कहा कि सड़क, सीवर, पानी और बिजली जैसी बाहरी आधारभूत सुविधाओं की कमी, उच्च वोल्टेज बिजली लाइनों को हटाने में देरी तथा विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण परियोजना प्रभावित हुई। कंपनी का दावा था कि परियोजना काफी हद तक पूरी हो चुकी है और वह आर्थिक रूप से सक्षम है। हालांकि न्यायाधिकरण ने उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों का अध्ययन करने के बाद याचिका स्वीकार कर ली।
इसके साथ ही कंपनी के विरुद्ध दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया। गुरुग्राम में रहेजा डेवलपर्स की विभिन्न परियोजनाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों के बीच इस आदेश को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे प्रभावित खरीदारों को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
लोगों का कहना है कि रहेजा डेवलपर्स ने ग्राहकों से पैसा लेकर अपनी दूसरी कंपनी में लगाया, जमीन खरीदी, अपने रिश्तेदारों, परिवार वालों के नाम पर संपत्तियां खरीदी और ग्राहकों को वर्षों तक बेवकूफ बनाया है। रेवांता प्रोजेक्ट के अलावा भी इन्होंने 6-7 अन्य प्रोजेक्ट्स में भी जनता का पैसा खाया है। यहाँ तक कि इन्होंने अपने कर्मचारियों जिन्होंने इनके लिए दिन रात काम किया, उनका 6-7 महीनों तक का वेतन भी नहीं दिया। अब वे कर्मचारी भी कोर्ट की शरण में जा रहे हैं।










