
नई दिल्ली।
‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘समुद्री अमृत काल विजन-2047’ को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। इसके अंतर्गत अब अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंटेनर भारत में बनेंगें। भारत के बढ़ते कंटेनर विनिर्माण पारितंत्र पर भरोसा जताते हुए मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम ग्रुप को भारत में निर्मित 1,000 अतिरिक्त शिपिंग कंटेनरों का ऑर्डर भी दिया। इसे दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक समुद्री आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला के बीच फरवरी 2025 में हुई बैठक के बाद सामने आई है। बैठक में प्रधानमंत्री ने कंपनी को भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर विनिर्माण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया था। महज 16 महीनों में भारत में बने पहले एक्जिम शिपिंग कंटेनर की अंतरराष्ट्रीय खरीद शुरू होना सरकार की त्वरित क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में 10 हजार करोड़ रुपए की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य आयातित कंटेनरों पर निर्भरता कम करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादन प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत ग्रीनफील्ड एवं ब्राउनफील्ड संयंत्रों को पूंजीगत सहायता, परिचालन सहायता, अनुसंधान, परीक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इसके अलावा 70 हजार करोड़ रुपए की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना, ‘वन नेशन-वन पोर्ट प्रोसेस’, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहल भी शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। साथ ही देश के तीन बंदरगाह कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 की वैश्विक शीर्ष-30 सूची में जगह बना चुके हैं। वधावन बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, टूना टेकरा कंटेनर टर्मिनल और आउटर हार्बर कंटेनर टर्मिनल जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।












