
म्यांमार का “रखाइन” बन सकता है एक नया देश, रखाइन की अराकान आर्मी ने म्यांमार और बांग्लादेश के चिन, कचिन, मगवे, सागाइंग, अय्यारवाडी और बागो को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में ले लिया। इन इलाकों में अराकान आर्मी के अधीन आम नागरिक अपना जीवन-बसर कर रहे हैं। अपराध को कंट्रोल में करने के लिए यहां अराकान आर्मी ने एक सिस्टम सेट कर रखा है।
2009 में रखाइन के बौद्ध समुदाय ने अधिक स्वायत्तता की मांग के साथ अराकान आर्मी बनाई। 2016 के बाद म्यांमार सेना और अराकान आर्मी के बीच संघर्ष तेज हो गया। इस दौरान रोहिंग्या समुदाय को बड़े पैमाने पर पलायन करना पड़ा। 2021 में सेना के सत्ता संभालने के बाद अराकान आर्मी ने अपनी ताकत और बढ़ा ली।
अब संगठन रखाइन को अलग राजनीतिक इकाई बनाने की कोशिश में है। उसके प्रमुख टुन म्यात नाइंग ने 2027 तक ‘पूरी तरह मुक्त अराकान’ का लक्ष्य रखा है। हाल के महीनों में ड्रोन और आधुनिक हथियार मिलने से अराकान आर्मी की सैन्य ताकत भी काफी बढ़ी है। अराकान आर्मी ने रखाइन राज्य के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण का दावा किया है और कई इलाकों में टैक्स वसूली, पहचान पत्र और स्थानीय प्रशासन चला रहा है।
अभी तक किसी देश ने रखाइन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है, लेकिन जिस तरह अराकान आर्मी जमीन पर समानांतर शासन चला रही है, उसने इस संभावना पर अंतरराष्ट्रीय बहस जरूर तेज कर दी है। यूनाइटेड लीग ऑफ अराकान (ULA) म्यांमार के रखाइन राज्य का एक प्रमुख राजनीतिक संगठन है, जिसे अराकान आर्मी (AA) का राजनीतिक विंग माना जाता है। अगर भविष्य में रखाइन अलग राजनीतिक इकाई बनता है, तो सबसे मजबूत दावेदार अराकान आर्मी होगी।
अराकान आर्मी ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है, वहां अपना प्रशासन भी शुरू कर दिया है। वह लोगों से टैक्स वसूल रही है, अपनी अदालतें चला रही है और सरकारी व्यवस्था जैसी कई सेवाएं दे रही है। इतना ही नहीं, वह अपनी बैंकिंग व्यवस्था बनाने की भी कोशिश कर रही है, ताकि म्यांमार की सैन्य सरकार की आर्थिक व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े।











