
राजस्थान के प्रसिद्ध बुटाटी धाम में 22 करोड़ के गबन के प्रमाण मिले हैं। एसडीएम की रिपोर्ट में समिति से संबंधित सदस्यों की निजी संपत्तियां कुर्क कर भू-राजस्व बकाया की तरह वसूलने और 12 से 18 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज लगाने की अनुशंसा की गई है।
डेगाना एसडीएम की ओर से नागौर कलेक्टर को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में मंदिर विकास समिति की वित्तीय अनियमितताओं का विस्तृत खुलासा हुआ है। प्रशासन की ओर से गठित 13 सदस्यीय जांच समिति ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के ऑडिट रिकॉर्ड का वास्तविक दस्तावेजों से मिलान किया तो करीब 22 करोड़ रुपए के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिले। समिति अध्यक्ष को कई बार नोटिस देकर स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जांच दल ने श्रद्धालुओं के चढ़ावे, न्यास की संपत्ति और दान राशि के दुरुपयोग की पुष्टि की है।
पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोना था, नई समिति ने कार्यभार ग्रहण करते समय 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना प्राप्त होना दर्ज किया। वर्तमान में करीब 2.60 करोड़ रुपए मूल्य की यह संपत्ति मौजूद है, लेकिन इसे संस्था की लेखा पुस्तकों, स्टॉक रजिस्टर और वित्तीय अभिलेखों में विधिवत दर्ज ही नहीं किया गया। दो वर्षों में भोजनशाला निर्माण पर 49.49 लाख रुपए खर्च दिखाए गए, जबकि जांच में सामने आया कि ग्राउंड फ्लोर का पूरा निर्माण एक भामाशाह ने अपने निजी खर्च से कराया था। समिति ने फर्जी बिल लगाकर मंदिर निधि से राशि निकाल ली। वहीं रसोई खर्च एक साल में 335 प्रतिशत बढ़ाकर 90.64 लाख कर दिया गया। दो वर्षों में 1.17 करोड़ रुपए खर्च दिखाए गए, लेकिन सप्लायर सूची, जीएसटी बिल और भोजनार्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
सीसीटीवी कैमरों पर 82.41 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन कोई निविदा या कोटेशन नहीं मिला। जांच में “एम जंक्शन सर्विसेज” के नाम 58.14 लाख का भुगतान दर्ज मिला, जबकि संबंधित वाउचर “रानाबाई ट्रेडर्स” के नाम के पाए गए। ग्राम विकास पर 31.37 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए, लेकिन न ठेकेदारों का रिकॉर्ड मिला और कार्य का कोई भौतिक प्रमाण भी नहीं मिला।












