राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए

नई दिल्ली।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें देश की असाधारण विविधता दिखाई देती है और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को संरक्षित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हथकरघा क्षेत्र रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कला-संस्कृति और प्रकृति-प्रेम को बढ़ावा देता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी जुड़ा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख मानव-केंद्रित उदाहरण बनने की क्षमता रखता है। महत्वपूर्ण हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण विधियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठा रही है और इन प्रयासों से भारतीय हथकरघा की अंतरराष्ट्रीय छवि भी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक और नवाचारी डिजाइनों के साथ बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा उद्यमी हथकरघा क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थानों के जरिए युवाओं को सक्रिय सहयोग एवं मार्गदर्शन दिए जाने की जरूरत है। युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक ट्रेंड्स, ब्रांड्स और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश के हथकरघा बुनकरों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह उत्कृष्ट कारीगरी, हथकरघा के प्रति समर्पित जीवन और भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

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