अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों, जैसे चीन और भारत, को सजा देने वाले बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दी

अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों, जैसे चीन और भारत, को सजा देने वाले बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। उनका तर्क है कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है। इस बिल से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की पावर मिल जाएगी, जिससे ट्रंप के बेलगाम होने का खतरा भी बढ़ गया है।

चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के शीर्ष पांच आयातक हैं। अमेरिका इन पाँचों देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल ‘ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996’ की समय-सीमा को 2031 तक बढ़ा देगा। यह एक्ट उन कंपनियों को सजा देता है जो ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करती हैं। दोनों पार्टियों के समर्थन वाले इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया) और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था।

इसमें रूसी नेताओं और अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमीर उद्योगपति (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थान शामिल हैं। वोटिंग के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा कि ग्राहम को इस बात पर गर्व होता कि हमने क्या किया है। ब्लूमेंथल ने कहा, ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो बहादुर और आजाद लोगों के खिलाफ इस जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक युद्ध में शामिल हैं।

डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने इस कानून की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे टैरिफ लगाने के ऐसे व्यापक नए अधिकार मिल जाएंगे, जिनका इस्तेमाल राष्ट्रपति मनमाने ढंग से हथियार की तरह कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी कई बार किया है।

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