अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर: 2024 में साक्षरता दर अफ्रीका -69%, दक्षिण एशिया में 77%, यूरोप और अमेरिका में 98% रही

हर वर्ष 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा को मानव विकास और सामाजिक परिवर्तन का आधार मानने की प्रेरणा देता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2024 में दुनिया में करीब 754 मिलियन वयस्क निरक्षर थे, जिनमें 63 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसी अवधि में वैश्विक वयस्क साक्षरता दर 88 प्रतिशत और युवा साक्षरता दर 93 प्रतिशत रही। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रगति हुई है, लेकिन सार्वभौमिक साक्षरता का लक्ष्य अभी दूर है। साक्षरता की वास्तविक सफलता तभी है, जब ज्ञान हर व्यक्ति को समझ, अवसर, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की शक्ति देता है।

साक्षरता का सामान्य अर्थ पढ़ने और लिखने की क्षमता से लगाया जाता है, लेकिन बदलती दुनिया में इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक हो गया है। केवल शब्दों को पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है; जरूरी यह है कि व्यक्ति उनके अर्थ को समझे। कार्यात्मक साक्षरता का अर्थ है कि व्यक्ति पढ़ने, लिखने और गणना के ज्ञान का उपयोग अपने रोजमर्रा के जीवन में प्रभावी ढंग से कर सके। किसान बीज और खाद के पैकेट पर दी गई जानकारी समझ सके, मौसम का पूर्वानुमान पढ़ सके और सरकारी योजनाओं की शर्तों को जान सके। श्रमिक अपने वेतन, बैंक खाते और सरकारी सुविधाओं से संबंधित दस्तावेज समझने में सक्षम हो। इसी तरह महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी सलाह, दवाओं के निर्देश और बच्चों की शिक्षा से जुड़े जरूरी कागजात आसानी से समझ सकें।

संयुक्त राष्ट्र के 2025 के सतत विकास लक्ष्य (SDG) आंकड़ों के अनुसार 2024 में दुनिया की वयस्क साक्षरता दर 88 प्रतिशत और युवा साक्षरता दर 93 प्रतिशत रही। वर्ष 2014 से 2024 के बीच वयस्क साक्षरता में तीन प्रतिशत अंक और युवा साक्षरता में दो प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। हालांकि, वैश्विक औसत के पीछे क्षेत्रीय असमानताएं स्पष्ट हैं। 2024 में उप-सहारा अफ्रीका में वयस्क साक्षरता दर करीब 69 प्रतिशत रही, जबकि मध्य और दक्षिण एशिया में यह 77 प्रतिशत थी। इसके विपरीत यूरोप और उत्तरी अमेरिका में यह दर 98 प्रतिशत से अधिक रही।

भारत की साक्षरता कहानी को केवल राष्ट्रीय औसत से नहीं समझा जा सकता है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच इसमें उल्लेखनीय अंतर है। PLFS 2023-24 के अनुसार 7 वर्ष और उससे अधिक आयु की साक्षरता दर मिजोरम में 98.2 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 97.3 प्रतिशत, केरल में 95.3 प्रतिशत, त्रिपुरा में 93.7 प्रतिशत और गोवा में 93.6 प्रतिशत रही। वहीं बिहार में यह 74.3 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 75.2 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 72.6 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय औसत 80.9 प्रतिशत रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि साक्षरता केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बढ़ती, बल्कि गरीबी, स्कूलों की उपलब्धता, महिला शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक क्षमता भी इसे प्रभावित करती हैं।

आज केवल पढ़ना-लिखना जानना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को यह भी समझना जरूरी है कि बैंक खाता कैसे संचालित होता है, डिजिटल भुगतान में क्या सावधानियां रखनी चाहिए, ऋण की शर्तें क्या हैं, बीमा क्यों जरूरी है और बचत का सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। वित्तीय साक्षरता खासकर ग्रामीण परिवारों, छोटे कारोबारियों, किसानों और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

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