डॉ. श्रीकांत जिचकर जो थे भारत के सबसे अधिक पढ़े लिखे व्यक्ति, 20 डिग्रियां, 28 गोल्ड मेडल, 42 परीक्षाएं पास करने का रिकॉर्ड

विश्व साक्षरता दिवस पर विशेष

डॉ. श्रीकांत जिचकर केवल डिग्रियां लेने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे एक कुशल प्रशासक, राजनेता, लेखक और विचारक भी थे। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। उन्होंने यह दिखाया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आज चर्चा इसलिए क्योंकि 8 सितंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है तो सबसे अधिक शिक्षित व्यक्ति की चर्चा आवश्यक है।

विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत जब हुई तब पूरी दुनिया में की साक्षरता दर बहुत अच्छी नहीं थी। इस समय भारत की साक्षरता दर 80.9 फीसदी है। 2011 में यह 74 फीसदी थी. साल 1961 में भारत की साक्षरता दर सिर्फ 28.30 फीसदी और दस साल बाद साल 1971 में 34.45 फीसदी रही। अर्थात आजादी के 79 साल बाद भी भारत सौ फीसदी साक्षर नहीं है।

डॉ. श्रीकांत जिचकर का जन्म 14 सितंबर 1954 को नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पास 20 से अधिक आधिकारिक विश्वविद्यालय डिग्रियाँ थीं। उन्होंने कई वर्षों में 42 से अधिक विश्वविद्यालय की परीक्षाएं पास की थीं। एमबीबीएस (MBBS), एमडी (MD), एलएलबी (LLB), एलएलएम (LLM), एमबीए (MBA), पत्रकारिता में स्नातक, संस्कृत में डॉक्टरेट (D.Litt) और विभिन्न विषयों (जैसे इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, अंग्रेजी साहित्य आदि) में कई मास्टर डिग्री (MA) शामिल थीं।

उन्होंने 1978 में आईपीएस (IPS) और 1980 में आईएएस (IAS) की परीक्षा पास की थी। हालांकि, आईएएस अधिकारी के रूप में कुछ समय कार्य करने के बाद उन्होंने राजनीति में आने के लिए इस्तीफा दे दिया था। मात्र 26 वर्ष की आयु में वे देश के सबसे युवा विधायक (MLA) बने। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में एक साथ 14 विभिन्न विभागों (Portfolios) के मंत्री के रूप में कार्य किया। वे राज्यसभा सांसद और महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी रहे। 2 जून 2004 को नागपुर के पास एक भीषण सड़क दुर्घटना (कार हादसे) में उनका निधन हो गया था। उस समय उनकी आयु मात्र 49 वर्ष थी।

डॉ. जिचकर ने अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा हासिल की। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कानून का अध्ययन किया। उन्होंने प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े विषयों में भी शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र और दर्शन जैसे विषयों का अध्ययन किया। उन्हें संस्कृत और अन्य भाषाओं में भी रुचि थी। उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य से जुड़े विषयों को भी समझा।

डॉ. श्रीकांत जिचकर ने कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा भी पास की। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा और कानून से जुड़ी परीक्षाओं में भी सफलता प्राप्त की। वे अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते रहे। डॉ. जिचकर ने राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने। बाद में वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। राजनीति में रहते हुए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन जैसे विषयों पर काम किया। वे समाज के विकास को लेकर गंभीर थे। उनका मानना था कि देश की प्रगति के लिए शिक्षित और जागरूक नागरिक जरूरी हैं।

 

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