
निर्दलीयों ने भजनलाल की हवा निकाल दी है।मुख्यमंत्री के गृहनगर भरतपुर में 65 में से 36 वार्ड निर्दलीयों ने जीते हैं। यहां भाजपा को 20 सीट मिली हैं। अधिकतर निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा की सांस फुला दी हैं। अजमेर, बीकानेर और पाली में कांग्रेस ने ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। अलवर और जोधपुर में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
जयपुर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया। यहाँ BJP ने स्पष्ट बहुमत पा लिया है। 150 वार्डों की जंग में बहुमत का आंकड़ा भाजपा के नाम हो गया है। भाजपा ने 76 का आंकड़ा पार करके भाजपा की बोर्ड बनाने की राह साफ कर दी है।
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत हासिल की है। वहीं, भाजपा के खाते में 27 वार्ड आए हैं। भीलवाड़ा नगर निगम के कुल 70 वार्डों में भाजपा ने 45 वार्ड में जीत का परचम लहराया। वहीं, 15 निर्दलीय प्रत्याशीयों ने जीत दर्ज की। यहां कांग्रेस मात्र 10 वार्डों में जीत दर्ज करने के साथ ही तीसरे स्थान पर रही।
पाली नगर निगम के 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 वार्ड में जीत हासिल की। वहीं, भाजपा को 21 और निर्दलीय को 15 सीटें मिली हैं। बीकानेर नगर निगम के कुल 80 वार्ड में से कांग्रेस ने 42, भाजपा को 27, निर्दलीय को 10 और आरएलपी को 01 सीट मिली।
श्रीडूंगरगढ़- नगर पालिका में कांग्रेस को 15 जबकि भाजपा को 13 सीट मिली। नोखा- नगर पालिका में विकास मंच को 29 जबकि भाजपा को केवल 13 सीट मिली हैं।
इन नतीजों से लगता है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल कोई करिश्मा नहीं कर पाए हैं। साथ ही केंद्र सरकार की कई खतरनाक नितियों ने भाजपा का पतन शुरू कर दिया है। जैसे UGC कानून, SCST कानून, आरक्षण कानून आदि हैं जो भाजपा को मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे।









