15 सितंबर को इंजीनियर्स डे : महान अभियंता, प्रशासक और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर मनाया जाता है यह दिन

सड़क, पुल, रेलवे, बांध, बिजलीघर, मोबाइल नेटवर्क, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, उपग्रह, डिजिटल सेवाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष अभियान, इन सभी के पीछे इंजीनियरिंग और इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे महान अभियंता, प्रशासक और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर मनाया जाता है। उनका जीवन तकनीकी दक्षता के साथ अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। आज भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और आधुनिक बुनियादी ढांचे में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में इंजीनियर्स डे तकनीकी विकास को जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की हमारी जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।

इसी दिन 1861 में एम. विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग को केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के माध्यम के रूप में देखा। जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में उनके कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। उन्होंने ऐसी तकनीकी व्यवस्थाओं के विकास में योगदान दिया, जिनका उद्देश्य पानी का बेहतर उपयोग, सिंचाई की सुविधा और बाढ़ जैसी समस्याओं का प्रबंधन था। मैसूर क्षेत्र के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। कृष्णराज सागर बांध से जुड़े उनके कार्यों को भारत के जल संसाधन विकास के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।

इंजीनियरिंग का विकास सभ्यता के विकास के साथ-साथ हुआ है। पहिए का आविष्कार, सिंचाई की प्रारंभिक प्रणालियां, प्राचीन नगरों की जल निकासी व्यवस्था, भवन निर्माण और परिवहन के साधन ये सभी मानव की इंजीनियरिंग क्षमता के प्रारंभिक उदाहरण हैं। समय के साथ इंजीनियरिंग ने अनेक रूप धारण किए। सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, एयरोस्पेस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे अनेक क्षेत्र विकसित हुए। आज इंजीनियरिंग किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

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