
चित्तौड़गढ़ के भादसोड़ा में आदिनाथ श्वेतांबर मंदिर परिसर में एक अनोखा वटवृक्ष है। इसका मुख्य तना लोप हो गया है। ऊपर से नीचे की आने वाली जटाओं ने आपस में लिपटकर तने का रूप लेकर पेड़ को सहारा दिया हुआ है जिससे पेड़ मजबूती के साथ खड़ा है। इस पेड़ पर 13 प्रकार के पत्तियां आती है, इनमें गोलाकार, हृदयाकार, संकरी और नुकीली पत्तियां शामिल हैं। स्थानीय लोगो के अनुसार इस पेड़ की उम्र 300 साल से अधिक है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस वटवृक्ष को वर्षों पहले एक जति संत यहां लेकर आए थे। इसके बाद से यह मंदिर परिसर का हिस्सा बना हुआ है। जैन धार्मिक स्थलों में परिसर की वनस्पतियों को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है और कई स्थानों पर पेड़-पौधों के संरक्षण और विस्तार की परंपरा भी रही है।
आदिनाथ श्वेतांबर मंदिर के ट्रस्टी और अध्यक्ष राजमल भादविया के मुताबिक, यह वटवृक्ष वर्षों से मंदिर परिसर में मौजूद है। उनके अनुसार, पेड़ बिना दिखाई देने वाले पारंपरिक तने के जड़ों के सहारे खड़ा है और इस पर 13 तरह की पत्तियां नजर आती हैं। विशाल आकार के बावजूद मंदिर भवन को इससे अब तक नुकसान नहीं हुआ है। यही वजह है कि यह पेड़ स्थानीय लोगों के लिए आस्था के साथ-साथ कौतूहल का भी केंद्र बना हुआ है।












