विश्व बांस दिवस : 18 सितंबर, इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों को बचाना, जंगलों को कटने से बचाना और पर्यावरण का संरक्षण करना

दुनियाभर में 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों को बचाना है। जंगलों को कटने से बचाना है। बांस का इस्तेमाल बढ़ेगा, तो जंगल की कटाई रुकेगी और इससे पर्यावरण का संरक्षण होगा। यही वजह है कि बांस का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। झारखंड में भी बंबू ट्रीटमेंट प्लांट (Bamboo Treatment Plant) बनाये गये हैं, जहां बांस को न केवल घुन लगने से बचाने के लायक बनाया जाता है, बल्कि प्रोसेसिंग के बाद उसकी उम्र भी बढ़ जाती है।

बांस की खेती में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता. इसके रख-रखाव के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती, इसलिए इसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ-साथ झारखंड में भी बांस से बने उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे दैनिक इस्तेमाल की चीजें बनायी जा रही हैं। उसे दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जा रहा है और इसे काफी पसंद भी किया जा रहा है।

सिर्फ झारखंड से 19 देशों में बांस के उत्पाद का निर्यात किया जाता है। इससे बांस के किसानों की कमाई तो होती ही है, गांवों में बांस के उत्पाद बनाने वाले कारीगरों की भी अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। देश में विदेशी मुद्रा आती है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। सरकार गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) की मदद से बांस के उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। इसका लाभ बांस के किसानों और कारीगरों के साथ-साथ इस उद्योग से जुड़ी कंपनियों को भी हो रहा है।

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