बीपाल-एम रेजिमेन से एमडीआर टीबी मरीज छह माह में हो रहे हैं स्वस्थ : मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव

– बीपाल-एम रेजिमेन से आगरा में हो रहा एमडीआर टीबी मरीजों का उपचार
– आगरा में चले पायलट प्रोजेक्ट में 92 प्रतिशत रहा ट्रीटमेंट सक्सेज रेट

आगरा,
आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अब एमडीआर (ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) मरीजों को सालों साल दवाएं नहीं खानी पड़ेंगी। वह अब कम दवाएं खाकर छह माह में ही स्वस्थ हो सकेगा। इसके लिए बीपाल-एम (BPaL M) रेजिमेन पद्धति के तहत आगरा में पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया गया, जो कि सफल हुआ है। इसमें ट्रीटमेंट सक्सेज रेट 92 प्रतिशत आया है। अब आगरा में इसी पद्धति से एमडीआर टीबी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

डीटीओ ने बताया कि देश में एमडीआर टीबी के इलाज के लिए बीपाल-एम रेजिमेन को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पीएमडीटी के तहत डब्लूएचओ द्वारा अनुशंसित नवीनतम रेजिमेन है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत यह दवा-प्रतिरोधी टीबी के पात्र मरीजों के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण आधुनिक विकल्प है। आगरा में अक्तूबर 2021 से सितंबर 2024 तक बीपाल-एम रेजिमन के लिए पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, इसमें 220 पुरुष और 190 महिला पात्र मरीजों का उपचार किया गया था, जिसमें 92 प्रतिशत ट्रीटमेंट सक्सेज रेट हासिल हुई थी। आगरा में 24 मार्च 2025 से बीपाल-एम रेजिमेन के द्वारा एमडीआर टीबी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

डीटीओ ने बताया कि बीपाल-एम, चार दवाओं का संयोजन है, बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन। एमडीआर के पुराने इलाज में मरीज को लगभग 18 माह तक कई दवाएं खानी पड़ती थीं। लेकिन बीपाल-एम पद्धति से केवल छह माह तक दवाओं का सेवन करना पड़ता है, पहले रोजाना कई गोलियां खानी पड़ती थी जबकि इस पद्धति में रोजाना केवल चार गोली रोजाना खानी पड़ती हैं। यह इलाज पूरी तरह से ओरल है इसमें कोई इंजेक्शन नहीं देना पड़ता है। इससे मरीज को काफी सहूलियत होती है।

टीबी मुक्त भारत अभियान में यह एक नई उपलब्धि है। अब एमडीआर टीबी मरीजों का उपचार जल्द और आसान तरीके से हो सकेगा। बीपाल-एम पद्धति से उपचार के दौरान नियमित चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है और केवल पात्र मरीजों को ही यह ट्रीटमेंट दिया जाता है।

चार दवाओं का संयोजन है बीपाल-एम :
– पहले 18 माह तक एमडीआर टीबी मरीजों को खानी पड़ती थी दवा
– अब छह माह तक केवल रोजाना चार गोली खाकर ही मरीज हो जाता है स्वस्थ
– आगरा में चले पायलट प्रोजेक्ट में 92 प्रतिशत रहा ट्रीटमेंट सक्सेज रेट

क्या है एमडीआर टीबी ?
मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस या एमडीआर टीबी का एक ऐसा प्रकार है, जिसमें टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर टीबी की कम-से-कम दो प्रमुख दवाएँ — आइसोनियाज़िड (Isoniazid) और रिफैम्पिसिन (Rifampicin) — असर नहीं करती हैं। टीबी का इलाज बीच में छोड़ने से यह विकसित हो जाता है। इसमें टीबी के बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। टीबी की दवाएँ अनियमित रूप से लेने या इलाज बीच में छोड़ने से इसका खतरा बढ़ सकता है।

एमडीआर टीबी के लक्षण :
– दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खाँसी रहना।
– खाँसी में बलगम या खून आना।
– बुखार और रात में पसीना आना।
– वजन कम होना और भूख न लगना।
– कमजोरी और थकान महसूस होना।

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