
श्रीनगर।
महामना मालवीय मिशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का प्रथम चरण श्रीनगर में सम्पन्न हुआ, जिसमें संगठन के विस्तार, आगामी कार्यक्रमों तथा राष्ट्र निर्माण में मिशन की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इसके उपरांत कश्मीर विश्वविद्यालय, हजरतबल में “*विकसित भारत और जम्मू-कश्मीर : मालवीय जी के चिंतन की प्रासंगिकता”* विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों एवं मिशन पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा थे। अपने उद्बोधन में उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक समरसता संबंधी योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में उनके विचार आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान तथा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. हरिशंकर सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी के दौरान महामना पंडित मदन मोहन मालवीय वाङ्मय की दो श्रृंखलाओं में प्रकाशित कुल 23 खंडों के ई-संस्करण का विमोचन किया गया। साथ ही वाङ्मय के अध्ययन, शोध एवं संदर्भ उपयोग को सरल बनाने के उद्देश्य से “रीडर्स गाइड टू द वाङ्मय” का भी लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने इसे मालवीय साहित्य एवं चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
संगोष्ठी के सफल समापन के उपरांत माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने मिशन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों को राजभवन, श्रीनगर आमंत्रित किया। उन्होंने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए माता वैष्णो देवी का प्रसाद भेंट किया तथा अपने आवास पर नाश्ते एवं कश्मीर की पारंपरिक मेहमाननवाजी के साथ सम्मानित किया। उपराज्यपाल महोदय द्वारा प्रदर्शित आत्मीयता, स्नेह एवं सम्मान से सभी प्रतिनिधि अभिभूत रहे।
कार्यक्रम में मिशन के संरक्षक श्री प्रभुनारायण जी, श्री के. एन. राय, राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. हरिशंकर सिंह, श्री गोविंदराम अग्रवाल, श्री दिनकर सिंह, श्री रोहित सिन्हा, श्री अनिमेष सक्सेना, डॉ. अर्चना गुप्ता, श्री प्रखर मिश्रा, श्री दिवाकर मिश्रा, श्री एस. के. गौतम, श्री रंजीत झा सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए पदाधिकारी उपस्थित रहे। आगरा संभाग का प्रतिनिधित्व महासचिव राकेश चंद्र शुक्ला तथा आईपीएस अधिकारी श्रीमती बबीता साहू ने किया।
अगले दिन प्रतिनिधियों ने श्रीनगर के प्रमुख पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। अनेक सदस्यों ने लाल चौक, डल झील तथा अन्य दर्शनीय स्थलों का अवलोकन कर कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव प्राप्त किया।
प्रतिभागियों ने कहा कि कश्मीर की पावन धरती पर मिला सम्मान, अपनत्व और सौहार्द उनके लिए सदैव स्मरणीय रहेगा तथा यह अनुभव राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सद्भाव को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।











