MSME दिवस 27 मई : करोड़ों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नवप्रवर्तकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर

नई दिल्ली।

MSME केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि समावेशी विकास, रोजगार सृजन, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय संतुलन, महिला सशक्तिकरण, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सबसे सशक्त वाहक है। भारत में छोटे और कुटीर उद्योगों का इतिहास सदियों पुराना है। हमारे यहां वैदिक काल से ही अलग-अलग तरह के शिल्प और कुटीर उद्योग फलते-फूलते रहे हैं। लेकिन आधुनिक समय में इसे कानूनी और व्यवस्थित पहचान साल 2006 के MSMED अधिनियम से मिली। समय बदला, तकनीक बदली और वैश्विक बाजार की मांगें भी बदलीं। इसे देखते हुए भारत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत इसकी पुरानी परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया। यह बदलाव एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ।

भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े उद्योग जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही अहम भूमिका सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी निभाते हैं। यदि बड़े उद्योग अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं, तो एमएसएमई उसकी धड़कन हैं, जो देश के दूर-दराज़ इलाकों तक विकास और रोजगार की ऊर्जा पहुंचाते हैं। 27 जून को मनाया जाने वाला ‘अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दिवस’ केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है। यह उन करोड़ों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नवप्रवर्तकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने साहस, मेहनत और संकल्प के बल पर न केवल अपनी आजीविका बना रहे हैं, बल्कि देश के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

MSME केवल उद्योगों का एक नेटवर्क भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की वह सशक्त आधारशिला है, जो गांव और शहर, अमीर और गरीब, पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक, तथा स्थानीय उत्पादन और वैश्विक बाजार के बीच एक सुदृढ़ सेतु का कार्य करती है। भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) का वर्गीकरण निवेश (Investment) और वार्षिक टर्नओवर (Turnover) के आधार पर किया गया है। इसके अनुसार, सूक्ष्म (Micro) उद्यम वे हैं, जिनमें संयंत्र, मशीनरी या उपकरणों में ₹1 करोड़ तक का निवेश तथा ₹5 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है। लघु (Small) उद्यम वे हैं, जिनमें ₹10 करोड़ तक का निवेश और ₹50 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है। इसी प्रकार, मध्यम (Medium) उद्यम वे हैं, जिनमें ₹50 करोड़ तक का निवेश तथा ₹250 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है।

भारत से विदेशों को होने वाले कुल निर्यात में MSME की हिस्सेदारी लगभग 40% से 45% के बीच है। हमारे पारंपरिक हस्तशिल्प, कपड़े, चमड़े का सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed Food) और यहां तक कि रक्षा क्षेत्र के बड़े उपकरणों के छोटे-छोटे कलपुर्जे भी इन्हीं लघु उद्योगों में बनते हैं और दुनिया भर में भेजे जाते हैं।

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