
• नानी, दादी को सेंटर पर बुलाकर पुरानी गलतफहमियों को किया जा रहा दूर
• बताया जा रहा कितनी भी गर्मी पड़े, छह माह तक के बच्चे को सिर्फ देना है मां का दूध
• मां के दूध में पानी सहित सभी पोषक तत्व मौजूद लिहाजा ऊपर से पानी देने की जरूरत नहीं
आगरा,
जीवनीमंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना शर्मा के अनुसार ऐसे मामले रोजाना ओपीडी में आते रहते हैं। इसलिए समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रसव कक्ष के पास ही स्तनपान कॉर्नर स्थापित किया गया है। यहां स्टाफ नर्स बच्चे की मां और दादी, नानी सहित परिवार के सदस्यों को काउंसलिंग देती है। साथ ही मां को स्तनपान का सही तरीका चार्ट के माध्यम से समझाया जाता है। मार्च 2026 से अब तक 575 गर्भवती और धात्री माताओं सहित परिवार के अन्य सदस्यों की काउंसलिंग की जा चुकी है।
नगला धनी निवासी शिवांगी (25) अपने पांच माह के बच्चे को एक्सक्लूसिव स्तनपान करा रही थी लेकिन गर्मी बढ़ी तो उसकी सास ने बच्चे को पानी पिलाना शुरू कर दिया। बच्चे की तबियत खराब हो गई। उसे बुखार और दस्त आने लगा। जीवनीमंडी स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर गई तो डॉक्टर ने पहला सवाल पूछा- मां के दूध के अतिरिक्त और क्या दे रही हो। बताया तो डाक्टर ने सास और परिवार के अन्य सदस्यों को बुलाया और समझाया कि शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में तरल होता है जो बच्चे में पानी की कमी नहीं होने देता। अब मेरी सास पड़ोस में अन्य लोगों को भी यही बात समझाती हैं।

उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनपद में ऐसी 74 स्वास्थ्य इकाइयों पर स्तनपान कार्नर स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से परिवारीजनों को स्तनपान के फायदों के बारे में बताया जा रहा है, जिससे शिशु स्वस्थ रहे और उसका सुचारू विकास हो सके। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल समुदाय में प्रभावी साबित हो रही है। आमजन में शिशु को केवल स्तनपान कराने को लेकर जागरुकता बढ़ रही है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा आहार है। यह शिशु के विकास के लिए जरूरी है और उसे कई बीमारियों से बचाता भी है। गर्मियों में भी मां के दूध में बच्चे की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए काफी तरल होता है।
बच्चे को दस्त, संक्रमण, निमोनिया से बचाता है मां का दूध :

जिला महिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी के अनुसार मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान होता है। जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाया जाना अति आवश्यक है । जन्म से छह माह की आयु तक शिशु को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही छह माह तक शिशु को पानी, शहद, घुट्टी, गाय/भैंस का दूध, जूस अथवा कोई अन्य तरल या ठोस आहार देने की आवश्यकता नहीं होती है। माँ के दूध में शिशु के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी भी होता है, जो गर्मी के मौसम में भी उसकी प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है। इसलिए अत्यधिक गर्म मौसम में भी छह माह से कम आयु के शिशु को अलग से पानी नहीं देना चाहिए। मां का दूध बच्चे की इम्युनिटी को भी मजबूत करता है, जिससे बच्चे को दस्त, संक्रमण, निमोनिया इत्यादि से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
लाभार्थियों की जबानी, स्तनपान की कहानी :
नगला छिददा निवासी 30 वर्षीय कोमल बताती हैं कि उनका बच्चा चार महीने का हो चुका है। वह जन्म के तुरंत बाद से ही उसे स्तनपान करा रही हैं। गर्मी होने पर लोगों ने सलाह दी कि बच्चे को पानी पिलाया करें तो मैंने चिकित्सक से सलाह लेना उचित समझा। मुझे बताया गया कि छह माह तक केवल स्तनपान ही कराना है। बच्चे को पानी न देने पर भी डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती। वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
मोतीलाल नेहरू रोड निवासी 33 वर्षीय पूनम बताती हैं कि उनका बच्चा आठ माह का है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्होंने अपने बच्चे को छह माह तक केवल स्तनपान कराया और आज उनका बच्चा एकदम स्वस्थ है। वह अपने बच्चों को अब ऊपरी आहार के साथ स्तनपान कर रही हैं। वह सभी को यही सलाह देती हैं कि छह माह तक केवल स्तनपान कराएं क्योंकि इसमें बच्चे के लिए जरूरी सारे पोषक तत्व होते हैं और यह बच्चे को कई बीमारियों से बचाता है।








