
फिरोजाबाद
जमीअतुलअब्बास रामगढ़ रोड़ फिरोज़ाबाद के तत्वाधान में मशहूर शायर कलीम नूरी फिरोज़ाबादी का ग़ज़ल संग्रह छपने और उनकी शायराना सलाहियत के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन 12 जुलाई 2026 रात 9 बजे अमजद अब्बासी साहब के हाल में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा०ज़फर आलम,अध्यक्षता उस्ताद शायर ज़ीरो बांदवी और शमा रौशन क़ासिम सिद्दीकी पार्षद और अलहम्द स्कूल के डायरैक्टर ने की। डा० अफसर,
वसीम अब्बासी और अमजद अब्बासी विशिष्ठ अतिथि थे।
मुन्ने खां अब्बासी ने कलीम नूरी का फूल मालाऐं और शाल उढ़ा सम्मान किया। अमजद अब्बासी ने कहा कि कलीम नूरी की शायरी लोगौं के दिल पर असर करती है।उनकी किताब मौसमे हिज्र मेंने पढ़ी तो बहुत शेर मुझे पसन्द आये। वो वास्तविक सम्मान के हक़दार हैं। वसीम अब्बासी ने कहा कि कलीम नूरी ने हमारे शहर नाम रोशन किया है उनकी शायरी लोगों को बहुत पसंद आती है हमारा सोभाग्य है कि हमें कलीम नूरी का सम्मान करने का मौका मिला।
क़ासिम सिद्दीकी ने कहा कि कलीम दूरी यकीनन सम्मान के हक़दार हैं उनकी शायरी ने अपनी पहचान बनाई है और हमारे शहर का नाम रोशन किया है उन्हें जो सम्मान अपने शहर मिलना चाहिए वह सम्मान नहीं मिला । हम कलीम दूरी के सम्मान में एक बड़ा कार्यक्रम रखेंगे।
कालीम नूरी के सम्मान में एक मुशायरा का भी आयोजन किया गया। मुशायरा का सफल संचालन मशहूर शायर इरफान साहिल ने किया। मुशायरे का आरम्भ शायर पैकर फिरोजाबादी की नाते पाक से हुआ, उन्होंने नबी की शान में नाते पाक यूं पेश की:–
“गूंज उठी सदाए मरहबा आमना के लाल आ गए
रहमतों की छा गई घटा आमना के लाल गए”
बहारिया दौर का आगाज़ करते हुए पैकर फिरोजाबादी का यह शेर बहुत पसंद किया गया…
दिखाई देता है जन्नत की पहली सीढ़ी पर
जो मां के हाथ पे पहली कमाई देता है
तहत के बाकमाल शायर अमजद रज़ा के ये शेर खूब पसंद किये गये…
“कहां तलाश करूं तुझको पालने वाले
के मुर्दा जिस्मो में भी जान डालने वाले
हमारी प्यास का रिश्ता है तेरी रहमत से
ज़मीं को चीर के ज़मज़म निकलने वाले”
मशहूर शायर कलीम नूरी फ़ीरोज़ाबादी ने श्रोताओं की फरमाइश पर कई ग़ज़लें पढ़ी । उनका ये कलाम ख़ूब पसंद किया गया।
” न तो सेहरा न ही सराबों में
न चमन के हसीं गुलाबों में
जब न दुनिया में हम नज़र आएं
ढूंढ लेना हमें किताबों में”
मन्ज़र नवाब की शायरी ने श्रोताओं को खूब हंसाया उन्होंने पढ़ा
मैं अपनी बीवी से डरता हूं इसलिए मंजर
क्योंकि उसके बाप का जूतौं का करखाना है
बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के अध्यक्ष असलम अदीब
ने अपनी शायरी से यूं पैग़ाम दिया।
” मिटाओ नफ़रतौं के ये अंधेरे
मुहब्बत के दिये हर सू जला कर”
इरफान साहिल ने ये शेर पढ़ कर खूब वाहवाही बटोरी
“हर बच्चा अब इंटरनेट से खेलेगा
गुड़िया, गुड्डा,मोर कबूतर टूट गए”
दुनियां भर में मशहूर हास्य व्यंग के बाकमाल शायर उस्ताद ज़ीरो बांदवी साहब के कलाम ने श्रोताओं को हंसी के ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनके ये अशआर खूब पसंद किए गये।
शाहरुख और सलमान तो मेरे चेले हैं
मैंने हर मैदान में पापड़ बेले हैं
अजहर तो बेगम का छोटा भाई है
मैंने हर वन्डे में जान बचाई है
एक-एक बॉल पे दो दो छक्के पेले हैं
मैंने हर मैदान में पापड़ बेले हैं
अन्य शायरौ के कलाम को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष ने कामयाब कार्यक्रम के लिये वसीम अब्बासी और अमजद अब्बासी को मुबारकबाद दी। मुन्ने खां अब्बासी साहब ने सभी शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।मुशायरे में मुख्य रूप से। कार्यक्रम में मुख्य रूप से
डा० अफसर, रियाजउद्दीन चौधरी, ज़ाकिर फिरोजाबादी, मो० तालिब, मो०नाज़िम भाई, मुख्तार आलम, मुन्ने खान, लाल मोहम्मद,मो० रईस, हमीद खां,परवेज, इस्माइल ,याकूब खां आदि का सराहनीय सहयोग रहा।








