
उत्तर प्रदेश के स्मार्ट सिटी बरेली में रिकॉर्ड बारिश ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। 24 घंटे में 381.1 मिलीमीटर बारिश ने शहर का हाल बेहाल कर दिया। मूसलाधार बारिश के बाद शहर की सड़कें, मोहल्ले और कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। बरेली की VIP रेजिडेंसी कॉलोनी भी इससे अछूती नहीं रही। रेजिडेंसी गार्डन में करीब छह फीट तक पानी भर गया, जबकि करीब 180 मकानों में पानी घुस गया। घरों में पानी भरने से लोगों के सामने रहने और जरूरी सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई। कई लोगों का कहना है कि घरों में रखा कैश और जेवर भी पानी में बह गए।
वर्ष 1981 से अब तक के आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे में इतनी बारिश पहले कभी दर्ज नहीं हुई थी। वर्ष 2005 में 267.2 मिलीमीटर बारिश का रिकॉर्ड था, जो इस बार टूट गया। सिकलापुर में पानी इतना भर गया कि लोगों को आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। राजेंद्रनगर समेत कई इलाकों की सड़कें पूरी तरह जलमग्न रहीं. सरकारी कार्यालयों में भी पानी भरने से कामकाज प्रभावित हुआ।

जलभराव बढ़ने के बाद रेजिडेंसी कॉलोनी के कई परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। लोगों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए बाहर निकाला गया। कुछ परिवारों ने होटल और अन्य सुरक्षित स्थानों में शरण ली. जलभराव वाले इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई। इससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। लगातार बारिश ने जर्जर मकानों के लिए भी खतरा बढ़ा दिया। शहर के तीन और ग्रामीण क्षेत्रों में दो समेत कुल 14 मकान गिर गए। इन हादसों में दो महिलाओं के घायल होने की जानकारी है। जिले में 15 पेड़ भी गिर गए, जिससे कई स्थानों पर रास्ते बाधित हुए।
सीबीगंज-बरेली के बीच रेलवे ट्रैक के किनारे खड़े पेड़ की शाखाएं टूटकर डाउन लाइन पर गिर गईं। ये शाखाएं 14674 शहीद एक्सप्रेस के इंजन से टकरा गईं, जिसके बाद ट्रेन रोकनी पड़ी। 14 विद्युत उपकेंद्रों में भी पानी भर गया। आंवला-अतरछेड़ी मार्ग पर डरुआपुर गांव के पास अरिल नदी पर बने रपटा पुल को पार करते समय बाइक सवार तीन युवक तेज बहाव में बह गए।












