
राजस्थान के स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा को हार का डर सता रहा है। उम्मीदवारों को जयपुर भेज दिया गया है। उनकी खातिरदारी और निगरानी भी की जा रही है, जिससे लगता है कि भाजपा को अपने उम्मीदवारों के दल बदल का भी डर है। निर्दलीयों को लुभाना भी शुरू कर दिया गया है ताकि अपनी संख्या बढ़ाई जा सके।
इन सब कामों को देखते हुए प्रतीत होता है कि राजस्थान में भजनलाल एंड पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। साथ ही टिकट बंटवारे को लेकर जो जनता में असंतुष्टि और आक्रोश था, उसे जनता ने वोट के जरिए भाजपा की घबराहट में बदल दिया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इन निकाय चुनावों में भाजपा को यदि हार मिलती है तो यह विधानसभा चुनाव में हारने वाला संकेत होगा। लोगों से बातचीत करने पर आभास हुआ कि राज्य में भजनलाल सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।
लोगों का कहना है कि भाजपा ने टिकट बंटवारे में अनेक सीटों पर बहुसंख्यक आबादी और योग्य उम्मीदवारों को अनदेखा किया है जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में भी स्थानीय लोगों में नाराजगी दिखाई देती है। उनके गृह क्षेत्र में दोनों वार्डों में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ सकता है जोकि खुद भजनलाल की छवि को धूमिल कर सकता है। हमने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में लोगों से बातचीत की और मन की बात जानने का प्रयास किया। स्थानीय निवासी नीरज मुदगल ने कहा कि भाजपा की सरकार विफल रही है। क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी सामान्य वर्ग की है जबकि सामान्य सीट होने के बावजूद अनुसूचित वर्ग के उम्मीदवार को टिकट दिया गया, जिससे लोगों में आक्रोश है।
अन्य निवासी जयसिंह, रामदयाल, विक्रम, शिवम आदि से बात करने पर पता चला कि अधिकतर लोगों में भाजपा की नकारात्मक छवि बन चुकी है। यह पार्टी जनता की बात नहीं सुनकर उन्हें दरकिनार कर रही है, लेकिन जनता इन्हें सबक सिखाने वाली है। ये गद्दी पर बैठकर यह भूल गए कि हमने ही इन्हें गद्दी पर बिठाया है और हम उतार भी सकते हैं।
कुल मिलाकर लगता है कि भाजपा का घमंड टूटेगा और दूसरा दल ऊपर उठेगा। यदि ऐसा होता है तो जल्द ही भजनलाल शर्मा कुर्सी हिलेगी और राजस्थान में मुख्यमंत्री बदल सकता है। क्योंकि जनता का कहना है कि भजनलाल लकड़ी का तोता है और हमें वो तोता नहीं चाहिए।







