विश्व शहर दिवस : 31 अक्टूबर, 2026 के विश्व शहर दिवस की थीम ‘शहरों का पुनरुद्धार: सभी के लिए पर्याप्त आवास’

विश्व शहर दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 68/239 के माध्यम से 31 अक्टूबर को विश्व शहर दिवस घोषित किया था। इसका प्रमुख उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण से पैदा होने वाले अवसरों और चुनौतियों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना, विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और सतत शहरी विकास को प्रोत्साहित करना है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के मानव बस्तियों से जुड़े कार्यक्रम यूएन-हैबिटेट के प्रयासों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अवसर पर दुनिया के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें शहरी विकास के नए मॉडल, योजनाओं और चुनौतियों पर चर्चा होती है।

किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक बदलाव की तस्वीर उसके शहरों में साफ दिखाई देती है। ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, आधुनिक परिवहन व्यवस्था, रोजगार के अवसर और तेजी से विकसित होते बाजार किसी शहर की पहचान जरूर बनाते हैं, लेकिन किसी शहर की वास्तविक सफलता केवल उसकी चमक-दमक से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता से तय होती है। क्या हर व्यक्ति को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार और प्रदूषणमुक्त वातावरण मिल रहा है? तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में ये सवाल पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

वर्ष 2026 के विश्व शहर दिवस की थीम ‘शहरों का पुनरुद्धार: सभी के लिए पर्याप्त आवास’ (Regenerating the City: Adequate Housing for All) है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास को सभी के लिए सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास उपलब्ध कराने का माध्यम बनाना है। इस वर्ष विश्व स्तर का मुख्य आयोजन चीन के फुझोउ शहर में हो रहा है। 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में शहरी नियोजन, पुराने इलाकों के पुनर्विकास, अनौपचारिक बस्तियों की स्थिति और आवास सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। थीम का संदेश है कि शहरों को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया में वहां पहले से रह रहे लोगों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। ।

भारत में शहर आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास, व्यापार, शिक्षा और तकनीकी नवाचार के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। छोटे और मध्यम शहरों में भी विकास की नई संभावनाएं उभर रही हैं। लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के अनुरूप शहरी सुविधाओं का विस्तार करना बड़ी चुनौती है। कई शहरों में यातायात जाम, प्रदूषण, जलभराव, कचरा प्रबंधन, पेयजल की कमी और अनियोजित निर्माण जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे में शहरों के विकास के लिए दीर्घकालिक योजना, बेहतर संसाधन प्रबंधन और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।

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