विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 7 जून : सुरक्षित भोजन से स्वस्थ समाज, सशक्त अर्थव्यवस्था और उज्जवल भविष्य

सुरक्षित भोजन से स्वस्थ समाज, सशक्त अर्थव्यवस्था और उज्जवल भविष्य की परिकल्पना की जा सकती है। अन्न केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानव अस्तित्व का मूलाधार है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित भोजन के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, खाद्य जनित रोगों की रोकथाम तथा “सुरक्षित भोजन, स्वस्थ जीवन” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है। वास्तव में, सुरक्षित भोजन स्वस्थ समाज, सशक्त अर्थव्यवस्था और सतत भविष्य की अनिवार्य शर्त है।

मानव जीवन की आधारशिला भोजन है, पर भोजन तभी जीवनदायी बनता है जब वह सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त हो। “अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्” उपनिषदों की यह दिव्य उद्घोषणा अन्न को ब्रह्म के समकक्ष प्रतिष्ठित करती है, क्योंकि समस्त जीवन की धारा उसी से प्रवाहित होती है। अन्न केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानव अस्तित्व का मूलाधार है। यदि भोजन ही रोगों का वाहक बन जाए, तो वह अमृत के स्थान पर विष का कार्य करने लगता है। आज वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण, बदलती जीवन शैली और जटिल होती खाद्य आपूर्ति प्रणालियों के युग में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

खाद्य जनित रोगों से उत्पन्न गंभीर वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2018 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। वर्ष 2019 में इसका प्रथम आयोजन हुआ और तब से यह दिवस विश्वव्यापी जन-जागरूकता अभियान का स्वरूप ग्रहण कर चुका है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 60 करोड़ लोग दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं और लगभग 4.2 लाख लोगों की मृत्यु खाद्य जनित रोगों से हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है, जो इस संकट की गंभीरता को और अधिक स्पष्ट करती है। दूषित भोजन केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है; यह आर्थिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डालता है। असुरक्षित भोजन के कारण स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है, श्रम उत्पादकता घटती है, व्यापार प्रभावित होता है और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है।

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