
नई दिल्ली।
गृह मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देश के अगले 100 वर्षों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी सरकारों, विभागों, संतों, युवाओं और मातृशक्ति को एक मंच पर आकर संयुक्त रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई में समाज के हर वर्ग की भागीदारी बेहद जरूरी है।
अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों से अपील की कि राष्ट्रीय नशीले पदार्थ समन्वय पोर्टल (एनसीओआरडी) की बैठकों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें पूरी तरह परिणाम-उन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बैठकों में लिए गए फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, उनकी नियमित समीक्षा हो और कमियों का गंभीर विश्लेषण किया जाए, तभी वास्तविक सफलता मिलेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि आज का नारकोटिक्स नेटवर्क लगातार विकसित हो रहा है। ड्रग्स तस्कर नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसलिए इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एक समग्र और आधुनिक रणनीति अपनानी होगी।
उन्होंने साफ कहा कि ड्रग्स के अवैध कारोबार में शामिल अपराधियों के खिलाफ सरकार की नीति पूरी तरह बेहद सख्त होनी चाहिए। वहीं, जो लोग नशे के शिकार हैं, उनके प्रति सहानुभूति अपनाते हुए इलाज, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर देना चाहिए। अमित शाह ने पिछले वर्षों में नशे के खिलाफ हुई कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स जब्त किए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि सरकार का अभियान लगातार प्रभावी और सफल दिशा में आगे बढ़ रहा है।










