गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस का 12 जुलाई को होगा उद्घाटन, निर्माण में 9 वर्ष की देरी हुई, लागत 113 से बढ़कर हो गई 295 करोड़

गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस का 12 जुलाई को उद्घाटन होना तय हुआ है। इसके निर्माण की कहानी भी दिलचस्प है। इसका निर्माण साल 2014 में शुरू हुआ था। इसे गुरुग्राम में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में देखा गया था।

साल 2014 से शुरू हुई इस परियोजना की लागत 113 करोड़ रुपए थी और इसका निर्माण कार्य 2017 में समाप्त करके सौंपा जाना चाहिए था। लेकिन इसका निर्माण अब 2026 में पूरा हो पाया है और 12 जुलाई 2026 को इसका उदघाटन किया जाना तय किया गया है।

टावर आफ जस्टिस का उद्देश्य जिला एवं सत्र न्यायालय की विभिन्न अदालतों, प्रशासनिक कार्यालयों और न्यायिक सुविधाओं को एक ही परिसर में लाना है। इससे न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

परियोजना में देरी का असर इसकी लागत पर भी पड़ा। शुरुआती अनुमान के अनुसार निर्माण पर करीब 113 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन तकनीकी बदलाव, निर्माण में देरी और अन्य प्रशासनिक कारणों से इसकी लागत बढ़कर लगभग 295 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

टावर आफ जस्टिस परियोजना की शुरुआत 2014 में की गई थी। इसे गुरुग्राम में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में देखा गया था। शुरुआत में निर्माण कार्य वर्ष 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद समय सीमा बढ़ाकर 2020, फिर 2024 और फिर 2025 तक की गई। अब यह परियोजना वर्ष 2026 में पूरी हो रही है।

कार्य में 9 वर्ष की देरी होने के कारण इसकी निर्माण लागत 113 से बढ़कर 295 करोड़ रुपए हो गई है। अब एक अहम सवाल उठता है कि लागत में 182 करोड़ यानी 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी का जिम्मेदार कौन है? क्या उसकी जवाबदेही तय की जाएगी?

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