मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से संवाद और रिश्तों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश

मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से संवाद और रिश्तों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश की गई है। शीर्ष नेतृत्व की यह बातचीत आपसी भरोसा बढ़ाने और भविष्य के रिश्तों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ दोनों देशों के बीच बने सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाने पर चर्चा की उम्मीद है।

अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया की प्रमुख शक्तियां इस बातचीत से निकलने वाले संकेतों पर नजर रख रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और चीन के बीच बॉर्डर विवाद के बीच मौजूदा समझौतों तथा सहमतियों पर अमल करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए।

भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। हाल के वर्षों में सीमा विवाद के कारण रिश्तों में आए तनाव के बाद दोनों देश संबंधों में सुधार की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस बातचीत से निकलने वाले संदेश पर देश और दुनिया की नजर टिकी हुई है।

राष्ट्रपति शी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के लिए भी उचित नहीं बताया और शांति एवं स्थिरता कायम करने के लिए प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला दिन भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा। सदस्य देशों ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर सहमति जताते हुए साझा बयान जारी किया। बयान में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने, पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने पर जोर दिया गया।

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