
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की द्रंग खदान से सेंधा नमक निकालने की तैयारी हो गई है। द्रंग खदान से निकलने वाला चट्टानी गुम्मा (हिमाचल में) नमक, बाकी जगह सेंधा नमक, अब देश की थाली तक पहुंचने की तैयारी में है। वर्षों से चली आ रही नमक को खाद्य उपयोग के योग्य बनाने की योजना अब सिरे चढ़ने की स्थिति में है। करीब डेढ़ साल से बंद खदान में दोबारा उत्पादन शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
खदान से निकलने वाले चट्टानी नमक को केवल खनन उत्पाद तक सीमित रखने के बजाय खाद्य उपयोग के योग्य बनाकर बाजार में उतारने की तैयारी है। इसके लिए नमक की गुणवत्ता जांच, प्रसंस्करण और विपणन की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
स्वीकृत खनन योजना के तहत पांच साल में करीब 7,700 टन चट्टानी नमक निकालने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में खनन क्षेत्र को सुरक्षित तरीके से खोला जाएगा।
इसमें नमक में 70% से अधिक सोडियम क्लोराइड के अलावा पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और प्राकृतिक आयरन ऑक्साइड (गुलाबी रंग) जैसे खनिज पाए जाते हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सीधे चट्टान के रूप में खनन प्रभावित हुआ है, लेकिन यहां चट्टानों से रिसने वाला प्राकृतिक नमकीन पानी और खनिज आज भी उपलब्ध हैं, जिसे लोग और पर्यटक बोतलों में भरकर ले जाते हैं। सरकार और हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड द्वारा इसका उत्पादन और रिफाइनरी का काम फिर से बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।










