
गायों के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक कमाई का उदाहरण भी बन गई है कटनी की “बजरंग गौशाला “। इस गौशाला में बायोगैस, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक दवाएं बनाकर आय का स्रोत बढ़ाया गया है। जिससे गौमाता की सेवा, चिकित्सा, कर्मचारियों के वेतन में भी सहयोग मिल रहा है।

यहां करीब 400 गायें हैं। इनमें से कुछ पंचायत को सड़कों पर बेसहारा घूमती मिली थीं तो कुछ दान में प्राप्त हुई है। समिति इनके गोबर और मूत्र से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, बायोगैस, एजोला जैसे जैविक उत्पाद बनाती हैं।
मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह ने बताया कि आसपास के गांवों और सड़कों पर आवारा घूम रही गायों को संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच के लेटर पैड के माध्यम से यहां लाया जाता है। इसके अतिरिक्त कई गायों को दान स्वरूप भी इस गौशाला में समर्पित किया गया है। गौशाला में फिलहाल तीन नियमित कर्मचारी हैं।
उन्होंने बताया कि शासन से प्रति गाय प्रति दिन ₹40 का अनुदान प्राप्त हो रहा है। वहीं, गो-उत्पादों की बिक्री से हो रही कमाई से गोशाला में अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पिछले एक साल में जैविक उत्पादों की बिक्री से 1.5 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हुई है। इस आय का उपयोग गौशाला के रखरखाव और गायों के चारे-पानी पर खर्च किया जा रहा है।








